साम्यवाद और पूंजीवाद : एक परिचय

socialism

Socialism : – राजनीतिक दर्शन में साम्यवाद को महत्वपूर्ण ढांचे के रूप में माना जाता है, यह एक सामाजिक – आर्थिक मठ है। जो उत्पादन के साधनों के राज्य हीन समाज की स्थापना का समर्थन करता है।

Socialism : साम्यवाद

साम्यवाद (Socialism) मूल रूप से एक स्वतंत्र समाज का विचार है, जिसमें कोई विभाजन नहीं होता है। जहां मानव जाति उत्पीड़न और अपर्याप्त से मुक्त है, साम्यवाद में किसी सरकार या देश की आवश्यकता नहीं है। यह एक ऐसी दुनिया है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति आवश्यकता की वस्तुओं को अपनी क्षमता अनुसार देता है और उनकी आवश्यकता अनुसार प्राप्त करता है। साम्यवाद के मुख्य रूप से जैसे लेनिनबाद, ट्रांटस्कीइज्म और लक्सबर्गबाद पर आधारित है। साम्यवाद (Socialism) के गैर सरकारी संस्करण ईसाई साम्यवाद और अराजकतावादी साम्यवाद हैं।

19वीं सदी में समाजवाद और कम्युनिज्म जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता था, सामाजिक आर्थिक राजनीतिक दर्शन के रूप में माना जाता था। और उसने 1848 में कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो मैं लिखा था कि पूंजीबाद को सोचने से पहले रोकना चाहते थे, यह सामाजिक श्रेणी प्रणाली थी जिसमें श्रमिकों के दुर्व्यवहार को जन्म दिया। जिन श्रमिकों का बुरी तरह से व्यवहार किया बे जागरूक हो चुके थे, इस संघर्ष में जनता पूंजीवाद वर्ग के खिलाफ उठ सकती है और एक साम्यवाद स्थापित कर सकती है।

समाजवाद पर साम्यवाद (Socialism) का प्रभाव

साम्यवाद का मुख्य उद्देश्य समाज का विकास करना है, जहां लोग स्वयं की देखरेख करते हैं । साम्यवादी तथा उनके निर्देशों के तहत शुरू हुआ। कौन शासक हिटलर एक साम्यवादी तानाशाह था, उनके निर्देशों के तहत सर्वनाश शुरू हुआ। रिपोर्ट ने संकेत दिया कि लगभग 60 लाख लोग मारे गए यहुदियों का लक्ष्य उनके राज्य के व्यक्तियों से अधिक महत्वपूर्ण है।

समाजवाद साम्यवाद एक आर्थिक प्रणाली है, जहां सरकार के उत्पादन के अधिकांश कारको का का मालिक है । कार्ल मार्क्स और एंगेल्स कुछ लोगों द्वारा जनता का शोषण समाप्त करना चाहते थे, पूंजीवादी व्यवस्था उस समय श्रमिकों को बहुत कम वेतन के लिए कठोर और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने की आवश्यकता थी। आर्थिक विद्वानों के अनुसार साम्यवाद अवधारणा है और अर्थव्यवस्था और देशों को प्रतिबंधित करने के लिए एक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था है।

पूंजीवाद

पूंजीवाद एक प्रकार की सामाजिक प्रणाली है, जो व्यक्तित्व अधिकारों के विश्वास का पालन करता है। ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में पूंजीवाद का प्रयोग पहली बार उपन्यासकार विलियम्स ठाकरे द्वारा अपने उपन्यास “द न्यूवन” मे 1854 ई.  में किया गया था।

 

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